International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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Call for Paper Volume 8, Issue 5 (September-October 2026) Submit your research before last 3 days of October to publish your research paper in the issue of September-October.

कोरोना काल में महिलाओं की भूमिका

Author(s) Raju Nain
Country India
Abstract कोरोना काल (COVID-19 महामारी) के दौरान महिलाओं ने एक ओर जहाँ अग्रिम मोर्चे (फ्रंटलाइन) पर डटकर मानवता की सेवा की, वहीं दूसरी ओर घरेलू व आर्थिक मोर्चों पर भारी चुनौतियों का सामना किया।अग्रिम पंक्ति में योद्धा की भूमिका स्वास्थ्य सेवाएं: वैश्विक स्तर पर लगभग 70% स्वास्थ्यकर्मी महिलाएँ थीं, जिन्होंने नर्स, डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ के रूप में अस्पतालों में दिन-रात मरीजों की जान बचाई।सामाजिक व प्रशासनिक सहयोग: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय महिला प्रतिनिधियों ने मास्क निर्माण, राशन वितरण और लोगों को जागरूक करने में अहम योगदान दिया।घरेलू और पारिवारिक मोर्चे पर दबावदेखभाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी: लॉकडाउन, स्कूलों और क्रेच के बंद होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार परिजनों की देखभाल का पूरा बोझ महिलाओं पर आ गया।घरेलू कार्य में वृद्धि: घर से काम (Work from Home) और परिवार के सदस्यों के लिए लगातार भोजन व अन्य व्यवस्थाएं करने के कारण महिलाओं का अवैतनिक घरेलू श्रम कई गुना बढ़ गया।आर्थिक और मानसिक चुनौतियाँ रोजगार पर असर: अनौपचारिक क्षेत्र और सेवा क्षेत्रों (जैसे पर्यटन, आतिथ्य, खुदरा व्यापार) में कार्यरत बड़ी संख्या में महिलाओं की नौकरियाँ गईं या उनकी आय में भारी कमी आई।हिंसा और तनाव: लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि हुई, जिससे महिलाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
Published In Volume 7, Issue 3, May-June 2025
Published On 2025-06-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i03.86264

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