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E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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पैरा-एथलीट्स की सामाजिक-आर्थिक स्थिति एवं खेल सहभागिता: चयनित खेल प्रशिक्षण केन्द्रों का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

Author(s) Ms. Namita Upadhyay, Dr. Sheeba Siddiqui
Country India
Abstract प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य चयनित खेल प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पैरा-एथलीट्स की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, खेल सहभागिता, प्रशिक्षण सुविधाओं, पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग तथा उनके सामने उपस्थित सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत चुनौतियों का समाजशास्त्रीय अध्ययन करना है। अध्ययन इस धारणा पर आधारित है कि पैरा-एथलीट्स की स्थिति को केवल उनकी शारीरिक क्षमता या खेल प्रदर्शन के आधार पर नहीं समझा जा सकता, बल्कि उनकी सामाजिक स्थिति परिवार, आर्थिक संसाधनों, सामाजिक दृष्टिकोण, संस्थागत सुविधाओं, प्रशिक्षण व्यवस्था, रोजगार के अवसरों तथा सामाजिक मान्यता जैसे विभिन्न कारकों से निर्मित होती है।
अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़े चयनित खेल प्रशिक्षण केन्द्रों में पैरा-एथलीट्स से प्रत्यक्ष संपर्क, साक्षात्कार तथा क्षेत्रीय अवलोकन के माध्यम से संकलित किए गए। प्रारम्भिक पायलट अध्ययन में 15 पैरा-एथलीट्स को सम्मिलित किया गया, जिनमें 10 पुरुष तथा 5 महिलाएँ थीं और सभी उत्तरदाता 20-30 वर्ष की आयु-वर्ग से संबंधित थे। चयनित अध्ययन केन्द्रों में लखनऊ तथा ग्वालियर स्थित संस्थानों को सम्मिलित किया गया। अध्ययन के लिए साक्षात्कार अनुसूची का प्रयोग किया गया तथा क्षेत्रीय अनुभवों को समझने के लिए प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया।
प्रारम्भिक क्षेत्रीय अध्ययन से संकेत मिलता है कि पैरा-एथलीट्स को आर्थिक संसाधनों की कमी, सीमित पारिवारिक सहयोग, सामाजिक भेदभाव, आधुनिक खेल उपकरणों की कमी, उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं की सीमित उपलब्धता तथा प्रशिक्षण के बाद रोजगार और जीवन-वृत्ति संबंधी अनिश्चितताओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही, कुछ प्रशिक्षण केन्द्रों में नियमित प्रशिक्षण तथा आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध होने से खिलाड़ियों को खेल प्रतिभा विकसित करने का अवसर भी प्राप्त होता है।
अध्ययन पैरा-एथलीट्स की खेल सहभागिता को सामाजिक पहचान, सामाजिक सम्मान और सशक्तीकरण की प्रक्रिया से जोड़कर देखता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि पैरा-एथलीट्स के समग्र विकास के लिए केवल खेल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं हैय इसके साथ आधुनिक खेल सुविधाएँ, प्रशिक्षित मानव संसाधन, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सहायता, पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग, रोजगार के अवसर तथा दीर्घकालीन संस्थागत समर्थन आवश्यक हैं। इस प्रकार पैरा-स्पोर्ट्स को केवल खेल उपलब्धि के क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और सशक्तीकरण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में समझना आवश्यक है।
Keywords पैरा-एथलीट्स, दिव्यांगता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, खेल सहभागिता, सामाजिक समावेशन, संस्थागत सहयोग, सामाजिक सशक्तीकरण
Field Sociology > Sports
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-09-30
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.88659

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