International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 5 (September-October 2026) Submit your research before last 3 days of October to publish your research paper in the issue of September-October.

मृदुला गर्ग के उपन्यासों में विवाह संस्था और स्त्री की स्वतंत्र पहचान

Author(s) Dr. Varsharani Patle
Country India
Abstract सारांषः- मृदुला गर्ग समकालीन हिंदी कथा-साहित्य की ऐसी महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार हैं जिन्होंने स्त्री के जीवन को केवल परिवार, पत्नीत्त्व और मातृत्व की पारंपरिक सीमाओं में नहीं देखा। उनके उपन्यासों में विवाह संस्था एक स्थिर, पवित्र और निर्विवाद सामाजिक व्यवस्था के रूप में उपस्थित नहीं होती; बल्कि वह स्त्री की इच्छा, देह, चेतना, आत्मसम्मान, आर्थिक निर्भरता और व्यक्तित्व के प्रश्नों से जुड़ी एक जटिल सामाजिक संरचना के रूप में सामने आती है। गर्ग के स्त्री-पात्र विवाह का पूर्ण निषेध नहीं करते, किंतु वे विवाह के भीतर निहित असमानता, अधिकारवादी पुरुष मानसिकता, स्त्री की देह पर नियंत्रण तथा उसके स्वतंत्र निर्णय के दमन का प्रतिवाद करते हैं।‘उसके हिस्से की धूप’, ‘चित्तकोबरा’, ‘कठगुलाब’ और ‘मिलजुल मन’ जैसे उपन्यासों में स्त्री अपने जीवन की सार्थकता पति, परिवार या समाज द्वारा प्रदत्त पहचान में नहीं, बल्कि अपने विवेक, अनुभव, इच्छा और आत्मनिर्णय में खोजती है। विशेषतः ‘चित्तकोबरा’ की मनु विवाहेतर संबंध के माध्यम से केवल नैतिक-वर्जना को चुनौती नहीं देती, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि क्या विवाह स्त्री की संपूर्ण भावनात्मक, बौद्धिक और दैहिक जरूरतों का उत्तर दे सकता है। इसी प्रकार ‘कठगुलाब’ स्त्री के प्रति हिंसा, दमन और वस्तुकरण के विरुद्ध प्रतिरोध की बहुस्तरीय कथा है। मृदुला गर्ग के उपन्यास स्त्री-मुक्ति को परिवार-विरोध या पुरुष-विरोध के रूप में नहीं, बल्कि समानता, सम्मान, आत्मबोध और संबंधों में पारस्परिकता की स्थापना के रूप में प्रस्तुत करते हैं। मृदुला गर्ग की प्रमुख औपन्यासिक कृतियों में उसके हिस्से की धूप (1975), वंशज (1976), चित्तकोबरा (1979), अनित्य (1980), मैं और मैं (1984), कठगुलाब (1996) तथा मिलजुल मन (2009) शामिल हैं।
Keywords मुख्य शब्द-मृदुला गर्ग, विवाह संस्था, स्त्री-विमर्श, स्त्री-अस्मिता, स्त्री-स्वतंत्रता, दांपत्य, देह-विमर्श, पितृसत्ता, आत्मनिर्णय।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-01
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.88875

Share this