International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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प्रवर्तमान समय में बालिकाओकी शैक्षणिक समस्याएं

Author(s) Dr. रीना नाज़िरभाई वहोरा
Country India
Abstract किसी भी राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। महिला और पुरुष दोनों समान रूप से समाज के दो पहियों की तरह कार्य करते हैं और समाज को प्रगति की ओर ले जाते हैं। दोनों की समान भूमिका को देखते हुए यह आवश्यक है कि उन्हें शिक्षा सहित अन्य सभी क्षेत्रों में समान अवसर दिये जाएँ, क्योंकि यदि कोई एक पक्ष भी कमज़ोर होगा तो सामाजिक प्रगति संभव नहीं हो पाएगी। परंतु देश में व्यावहारिकता शायद कुछ अलग ही है। समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। यह न केवल किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करती है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत में महिलाओं की शिक्षा देश में जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दूसरे शब्दों में भारत में महिला शिक्षा का कड़वा सच यह है कि जब विकल्प आता है तो वे अपनी बेटी की बजाय बेटों की शिक्षा पर निवेश करना पसंद करती हैं, ऐसा माना जाता है कि बेटा बुढ़ापे में पिता का साथ देगा और दूसरी तरफ कुछ समय बाद लड़की की शादी हो जाएगी, वह दूसरे परिवार में चली जाएगी, इसलिए महिला शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता
Keywords प्रवर्तमान समय, प्रवर्तमान समय,,शिक्षात्मक समस्याएँ
Field Sociology > Education
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-08

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