International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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पर्यावरणीय नैतिकता और सतत जीवनशैली: एक अंतर्विषयी एवं भौगोलिक अध्ययन

Author(s) डॉ. भूपेश कुमार मिश्र, डॉ. श्रवण कुमार शुक्ल
Country India
Abstract वर्तमान समय में पर्यावरणीय संकट केवल प्राकृतिक संसाधनों की कमी अथवा प्रदूषण की समस्या नहीं है, बल्कि यह मानव व्यवहार, उपभोग की प्रवृत्तियों और प्रकृति के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारियों से भी जुड़ा हुआ है। तीव्र नगरीकरण, जनसंख्या का बढ़ता दबाव, संसाधनों का अनियंत्रित दोहन तथा उपभोक्तावादी जीवनशैली ने पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित किया है। ऐसी परिस्थितियों में पर्यावरणीय नैतिकता और सतत जीवनशैली की अवधारणाएँ विशेष महत्त्व रखती हैं। पर्यावरणीय नैतिकता मनुष्य और प्रकृति के संबंधों को नैतिक दृष्टिकोण से समझने का आधार प्रदान करती है, जबकि सतत जीवनशैली प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने का व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में पर्यावरणीय नैतिकता और सतत जीवनशैली के अंतर्संबंधों का अंतर्विषयी एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में मानव-प्रकृति संबंध, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग, पर्यावरणीय न्याय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति का है। इसमें पर्यावरणीय दर्शन, पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार, न्याय और भारतीय पारिस्थितिकी से जुड़े साहित्य तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दस्तावेज़ों की समीक्षा की गई है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि सतत जीवनशैली को केवल व्यक्तिगत व्यवहार में परिवर्तन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, पर्यावरणीय शिक्षा, स्थानीय संसाधनों का संरक्षण, उत्तरदायी उपभोग तथा प्रभावी नीतिगत प्रयासों की आवश्यकता है। भौगोलिक दृष्टिकोण इस विषय को अधिक व्यापक बनाता है, क्योंकि पर्यावरणीय समस्याओं और उनके समाधान का स्वरूप स्थान, संसाधनों की उपलब्धता, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों तथा स्थानीय जीवनशैली के अनुसार बदलता रहता है।
Keywords पर्यावरणीय नैतिकता, सतत जीवनशैली, भौगोलिक दृष्टिकोण, पर्यावरणीय न्याय, प्राकृतिक संसाधन, उत्तरदायी उपभोग, पर्यावरणीय शिक्षा।
Published In Volume 8, Issue 5, September-October 2026
Published On 2026-10-13
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i05.89671

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